Sunsalutation Yoga

सूर्य नमस्कार

भगवान की आरती जिस प्रकार घंटी के बिना और इंसान बिन कपड़ो के उसी प्रकार योग बिना “सुर्य नमस्कार” के बिना अधुरा है, कुछ दिनो पहले योग को वैदिक संस्कृतिक का प्रचार बताया जा रहा था पर सही मयने मे “सुर्य नमस्कार” सभी आसनो का पैकेज है।

 

“सुर्य नमस्कार”  को कुछ और भी कहा जा सकता है जैसे – सर्वांग योगासन षाष्टांग योग क्योकि “सुर्य नमस्कार”  में सभी आसनो को समावेश हो जाता है यदि कोई सिर्फ “सुर्य नमस्कार”  ही करता है तो उसे सारे आसनो का लाभ मिलता है, “सुर्य नमस्कार” एक योग पैकेज है जिसमे कि सात तरह के आसन आते है, ताड़ासन, अर्धचक्रासन, पादहस्तासन, आंजनेय आसन, प्रसरणासन, द्विपादासन, प्रसरणासन, भू-धरासन, अष्टांग, प्रविधातासन तथा भुजंगासन, इन सभी आसनो से हाथ और पैरो के दर्द दूर होते है और उनमे सबलता आती है। गर्दन फेफड़ो तथा पसलियों की मांसपेशियां सशक्त होती है फालतू चर्बी को शरीर हल्का फुल्का हो जाता है।

‘सूर्य नमस्कार’ करने के और भी फायदे है जैसे कि त्वचा रोग और साथ ही पेट से जुडी समस्या कब्ज,उदर रोग समाप्त के साथ – साथ पांचनतंत्र की क्रियाशीलता मे वृद्धि होती है।

 

 

 

 

 

 

You might be interested in

LEAVE YOUR COMMENT

Your email address will not be published. Required fields are marked *